{"product_id":"खामोश-अल्फाज़-khamosh-alfaaz","title":"खामोश अल्फाज़ Khamosh Alfaaz","description":"\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eSKU: BOBCD-00105\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eSelling price: 242\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eMRP:342\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eGenre: Poetry Book\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eLanguage: Hindi\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003ePages:90\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eBinding: Paperback\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eBook size: Lenth 8.5 inch \/ Width: 5.5 inch \/ height: 0.225 inch\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eISBN:\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e978-81-998485-2-8\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eItem Weight:  137 Grams\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eAuthor: \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eSudhanshu R. Prasad\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eProduct: Description\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eपुस्तक के बारे में\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eये कविताएँ मेरे उस सफर की शुरुआत हैं जो 2007 में शुरू हुआ था। पहली कविता थी — \"कैसे भूलूं\"। वो बस एक साधारण सवाल था जो मन में उठा, और शब्दों में उतर आया। उस वक्त नहीं पता था कि ये सवाल एक दिन इतने सारे शब्दों, भावनाओं और अनुभवों में बदल जाएगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eये संग्रह मेरे उन सालों का आईना है जब मैंने बहुत कुछ खोया, बहुत कुछ पाया, और बहुत कुछ समझा। दिल्ली की गलियों में, रातों की तन्हाई में, दोस्तों की बातों में, और अकेलेपन के बीच — ये कविताएँ बनीं। इसमें परिवार के उन रिश्तों की गहराई भी है जो जीवन की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा दर्द दोनों होते हैं। पापा से यारी जैसा लगने वाला वो स्नेह, उनके साथ बिताए पल, और उन अंतिम क्षणों की वो तीव्र यादें जो कभी मिटती नहीं। पापा की चिता के सामने खड़े होकर जो खालीपन महसूस हुआ, वो भी इन शब्दों में समाया। और माँ — मेरी माँ जैसी कविता में वो त्याग, वो प्रेम, वो ताकत है जो हर माँ अपने बच्चे के लिए रखती है। ये कविताएँ व्यक्तिगत हैं, लेकिन शायद हर किसी के मन में कहीं न कहीं ऐसी ही भावनाएँ छिपी हों।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eकुछ कविताएँ पुरानी हैं, कुछ नई — लेकिन सबमें एक ही सवाल है: हम इंसान कैसे जीते हैं इस दुनिया में, जहाँ प्रेम तो है, पर समाज उसे पूरा होने नहीं देता? जीवन के तीन मुख्य रंग घुलमिल गए हैं: प्रेम की वो गहराई जो हर इंसान महसूस करता है, दर्द जो जीवन का हिस्सा बन जाता है, और समाज की वो चुनौतियाँ जो हमें सोचने पर मजबूर करती हैं। ये कविताएँ किसी एक की कहानी नहीं, बल्कि उन भावनाओं की हैं जो हम सब जीते हैं — खासकर जब अपनों को याद करते हैं या उन्हें खोने का दर्द सहते हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eमैंने इन्हें ज़्यादातर मुक्त छंद में लिखा, क्योंकि भावनाएँ बंधनों को नहीं मानतीं। पाठक से बस इतनी गुज़ारिश है — इन कविताओं को पढ़ते वक्त थोड़ा रुकिए। अगर कहीं आपका अपना दर्द झलक जाए, तो समझिए कि आप अकेले नहीं हैं। अगर कहीं प्रेम की याद आए, तो मुस्कुराइए। और अगर समाज पर गुस्सा आए, तो सोचिए — शायद यही बदलाव की शुरुआत है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eये किताब \" खामोश अल्फाज़\" मेरे लिए एक तरह की मुक्ति है। उम्मीद है, आपके लिए भी कुछ न कुछ होगा — शायद एक साथी, शायद एक सवाल, शायद बस एक आंसू या एक मुस्कान।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eधन्यवाद उन सबका जो मेरे साथ रहे — खासकर उन अपनों का जो अब भी इन शब्दों में जीवित हैं — और उन सबका जो अब इन शब्दों के ज़रिए मेरे पास आएँगे।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"BOOKONTHEBOAT","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45105919164469,"sku":"BOBCD-00105","price":242.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0695\/6928\/2101\/files\/WhatsAppImage2026-04-06at12.18.23PM_1.jpg?v=1775555140","url":"https:\/\/bookontheboat.com\/products\/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b6-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc-khamosh-alfaaz","provider":"BOOKONTHEBOAT","version":"1.0","type":"link"}