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जब दुःख से मन घबरा जाये : हर दुःख में छुपी है एक नई शुरुआत
जब दुःख से मन घबरा जाये : हर दुःख में छुपी है एक नई शुरुआत
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Genre: Story Book
Language: Hindi
Pages:134
Binding: Paperback
Book size: Lenth 8.5 inch / Width: 5.5 inch / height: 00.25 inch
ISBN: 978-93-89785-65-4
Item Weight: 250 Grams
Author: Sunil Aganihotri
Product: Description
लेखक परिचय:
सुनील अग्निहोत्री,
जन्म 20 मार्च 1969 को ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में। पिता
श्री रमाकांत अग्निहोत्री मध्यप्रदेश शासन के कृषि
विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और माता श्रीमती
मनोरमा देवी एक सरल, स्नेहमयी एवं पारिवारिक
गृहिणी हैं।
प्रारंभिक शिक्षा- "शासकीय प्राथमिक विद्यालय- गोहद" तथा माध्यमिक
शिक्षा- "शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोहद, जिला- भिंड (MP)"
से प्राप्त की। इसके पश्चात "सिविल इंजीनियरिंग" में डिप्लोमा- "शासकीय
पॉलिटेक्निक कॉलेज, उज्जैन" से तथा ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन की
डिग्रियाँ "जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर" से प्राप्त कीं।
श्री सुनील अग्निहोत्री, पेशे से एक "सिविल इंजीनियर" हैं और एक प्रतिष्ठित
इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी में "एसोसिएट जनरल मैनेजर" के पद पर
कार्यरत हैं।
लेखन आपके जीवन का आत्मिक पक्ष है। आपने विभिन्न सामाजिक,
आध्यात्मिक, प्रेरणात्मक और समसामयिक विषयों पर स्वतंत्र रूप से लेखन
किया है, और आपके लेख समय-समय पर दैनिक भास्कर, नवभारत,
लोकगाथा, आचरण जैसे स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं।
पुस्तक "जब दुःख से मन घबरा जाए" आपकी पहली पुस्तक है, जो आपके
आत्मानुभव, चिंतन और जीवन दर्शन की गहराइयों से उपजी है। इस पुस्तक
में आपने यह संदेश दिया है कि दुःख जीवन का अंतनहीं, बल्कि आत्मबोध
की एक नई शुरुआत है।

