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आरंम्भ

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Genre: Story Book

Language: Hindi

Pages:202

Binding: Paperback

Book size: Lenth 8.5 inch / Width: 5.5 inch / height: 0.505 inch

ISBN: 978-93-89785-74-6

Item Weight: 282 Grams

Author: राजेन्द सिंह जादौन

Product: Description

राजेन्द्र सिंह जादौन समकालीन पत्रकारिता और साहित्य के ऐसे हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने अपनी
लेखनी से समय, सत्ता और समाज तीनों को एक साथ आईना दिखाया है। वे उन चुनिंदा लेखकों में
हैं जिनके लिए शब्द सिर्फ़ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि प्रतिरोध का औज़ार हैं। पत्रकारिता
जगत में उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि उनकी पहचान उनकी निर्भीकता,
सच्चाई के प्रति प्रतिबद्धता और धारदार कलम से बनी है।
राजेन्द्र सिंह जादौन की पत्रकारिता सुविधा और समझौते की नहीं, बल्कि संघर्ष और सवालों की
पत्रकारिता है। खोजी पत्रकारिता में उनकी मज़बूत पकड़ रही है, जहाँ वे तथ्यों की तह तक जाकर सत्ता और व्यवस्था की
परतें खोलते हैं। ऐसे दौर में, जब पत्रकारिता अक्सर कॉरपोरेट दबाव, राजनीतिक समीकरणों और तात्कालिक लोकप्रियता
की शिकार होती जा रही है, जादौन उस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं जो जनता के पक्ष में खड़ी होती है। वे सत्ता के सामने
खड़े एक अकेले, लेकिन सशक्त विपक्ष की तरह दिखाई देते हैं, जो बिना भय और लोभ के सच कहने का साहस रखता है।
उनका लेखन श्रमजीवी वर्ग की पीड़ा, आम आदमी की जद्दोजहद और हाशिए पर खड़े समाज की आवाज़ है। वे केवल
श्रमिकों और आमजन पर लिखते नहीं हैं, बल्कि अपने जीवन और कर्म से श्रमजीवी की परिभाषा को पुनर्परिभाषित करते
हैं। यही कारण है कि उनके लेखों में ज़मीन की गंध है और शब्दों में अनुभव की तपिश। उनकी भाषा सीधी, सटीक और
प्रहारक है, जो पाठक को सोचने के लिए विवश कर देती है।
पत्रकारिता के साथ-साथ काव्य में भी राजेन्द्र सिंह जादौन की उपस्थिति उतनी ही प्रभावशाली है। उनके लेखों में जितनी धार
है, उससे कहीं अधिक तीखापन और संवेदनशीलता उनकी कविताओं में दिखाई देती है। उनकी कविता भावुकता मात्र नहीं,
बल्कि समय का दस्तावेज़ है जिसमें आम आदमी का दर्द, व्यवस्था की विफलता और भीतर पलती उम्मीद एक साथ मौजूद
रहती है। वे कविता को सौंदर्य तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे सामाजिक हस्तक्षेप का माध्यम बनाते हैं।
उनका पहला काव्य-संग्रह एक फ़ितूर पाठकों के बीच व्यापक रूप से सराहा गया। इस संग्रह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जादौन
की कविता किसी क्षणिक आवेग का परिणाम नहीं, बल्कि गहरे अनुभव और सतत संघर्ष की उपज है। एक फ़ितूर की
सफलता के बाद प्रकाशित उनका दूसरा काव्य-संग्रह आरम्भ उनके रचनात्मक सफ़र का अगला और अधिक परिपक्क चरण
है। यह संग्रह न केवल उनकी कविता का विस्तार है, बल्कि उनके वैचारिक विकास और सामाजिक प्रतिबद्ता का भी प्रमाण
है।
राजेन्द्र सिंह जादौन का लेखन अपने समय से संवाद करता है, सवाल उठाता है और पाठक को निष्क्रिय उपभोक्ता नहीं,
बल्कि सजग नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। वे पत्रकार और कवि दोनों भूमिकाओं में समाज की चेतना को
झकझोरने वाले लेखक हैं, जिनकी लेखनी आने वाले समय में भी प्रासंगिक और आवश्यक बनी रहेगी।
आशिक चौबे
स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक

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