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माटी का आँगन
माटी का आँगन
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SKU: BOBCD-006
Title -माटी का आँगन
Selling price: 250
MRP:350
Genre: story
Language: hindi
Reading Age group 25 to 50
Pages:110
Binding: Paperback
Book size: Lenth 8.5 inch / Width: 5.5 inch / height: 0.105 inch
ISBN: 978-81-69393-12-6
Item Weight:139gsm
Author: Manish K. Yadav
Maximum Order Quantity:- 1
Product: Description:- माटी का आँगन” केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन, पारिवारिक मूल्यों, संघर्ष, प्रेम, त्याग और संस्कारों की जीवंत गाथा है।
यह पुस्तक रघुवीर और महादेवी के जीवन के माध्यम से उस पीढ़ी की कहानी कहती है, जिसने सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखे और अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की नींव रखी। यह उन लोगों की कथा है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी परिवार को टूटने नहीं दिया और रिश्तों को हर परिस्थिति में सबसे ऊपर रखा।
गांव की मिट्टी से जुड़ी यह यात्रा पाठक को उन दिनों में ले जाती है, जब परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं था, बल्कि एक-दूसरे के लिए जीने का भाव था। जहां बड़े-बुजुर्गों के अनुभव घर की धरोहर होते थे, जहां भाईचारा केवल शब्द नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा था, और जहां माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए स्वयं को समर्पित कर देते थे।
इस पुस्तक में संघर्ष है, सफलता है, बिछड़ने का दर्द है, रिश्तों की गर्माहट है, गांव की सादगी है, परिवार की शक्ति है और जीवन की वे सीखें हैं जो पीढ़ियों तक प्रासंगिक रहती हैं।
“माटी का आँगन” उन सभी पाठकों के लिए है जो अपने गांव, अपने बचपन, अपने माता-पिता, अपने दादा-दादी और उन पुराने दिनों की खुशबू को फिर से महसूस करना चाहते हैं।
यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, परिवार, प्रेम, सम्मान और संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।
यह एक आंगन की कहानी है, लेकिन इसमें हर परिवार अपनी परछाईं देख सकता है।
8) About the Author:
मनीष के यादव पिछले 15 वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कार्य करते हुए समाज, राजनीति, शासन-प्रशासन और जनसरोकारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है।
ग्रामीण भारत, लोक कल्याण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि रही है। पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने आम लोगों की कहानियों और सामाजिक विषयों को प्रमुखता से सामने लाने का प्रयास किया है।
“माटी का आँगन” उनका एक भावनात्मक साहित्यिक प्रयास है, जिसमें उन्होंने परिवार, संस्कार, संघर्ष और रिश्तों की उस दुनिया को शब्द दिए हैं, जो भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत रही है।
बृजेश तिवारी:- बृजेश तिवारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार हैं और लंबे समय से जनसंचार के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे अपना स्वतंत्र डिजिटल मीडिया मंच संचालित कर रहे हैं, जहां सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक विषयों पर नियमित रूप से सामग्री प्रस्तुत करते हैं।
सरल भाषा, सामाजिक समझ और संपादकीय दृष्टि के कारण उन्होंने पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। “माटी का आँगन” के संपादन, भाषा परिष्कार और प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

