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रेत की चिट्ठियां : जर्मनी की नई पीढ़ी की ईमानदारी

रेत की चिट्ठियां : जर्मनी की नई पीढ़ी की ईमानदारी

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SKU: BOBCD-007

Title -रेत की चिट्ठियां : जर्मनी की नई पीढ़ी की ईमानदारी 

Selling price: 250

MRP:350

Genre: Primary Genre: Travel Writing / Travelogue 

Language: Hindi

Pages:101

Binding: Paperback

Book size: Lenth 8.5 inch / Width: 5.5 inch / height: 0.45 inch

ISBN: 978-81-69393-23-2 

Item Weight: 129gsm

Author: Kaushlendra Mishra Kaushal
Maximum Order Quantity:- 1

Product: Description:-  : “रेत की चिट्ठियाँ” एक संवेदनशील और आत्ममंथन से भरी कथा है, जो जर्मन उपनिवेशवाद के काले इतिहास और नामीबिया की पीड़ित धरती के बीच जन्म लेती है। यह केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के अंतर्मन में उठते सवालों, अपराधबोध, करुणा और पुनर्मिलन की खोज है।

कहानी का केंद्र पात्र लियो बाउर है — एक युवा जर्मन, जो अपने पूर्वजों के अतीत से अनजान नहीं, बल्कि उससे जूझने का साहस रखता है। जब उसे अपने परदादा जोहान की पुरानी चिट्ठियाँ मिलती हैं, जिनमें नामीबिया में हुए हेरारो और नामा जनसंहार के संकेत छिपे होते हैं, तो वह सच्चाई की तलाश में अफ्रीका की यात्रा पर निकल पड़ता है।

नामीबिया की तपती रेत पर कदम रखते ही लियो केवल एक शोधकर्ता नहीं रहता, बल्कि इतिहास का एक साक्षी बन जाता है। वहाँ उसकी मुलाकात कोच्ची और अन्य स्थानीय लोगों से होती है, जिनकी स्मृतियाँ अब भी उस क्रूर अतीत की गवाही देती हैं। हर बातचीत, हर चुप्पी, और हर आँसू लियो के भीतर एक गहरी उथल-पुथल पैदा करता है।

जोहान की चिट्ठियाँ धीरे-धीरे एक ऐसे जर्मन सैनिक का चेहरा सामने लाती हैं, जो सत्ता के आदेशों के बीच अपनी मानवता से लड़ रहा था। इन चिट्ठियों को वर्षों तक एक अफ्रीकी परिवार ने सहेजकर रखा — जैसे वे केवल कागज़ नहीं, बल्कि एक अधूरी माफ़ी हों।

लियो इस विरासत को सिर्फ समझना नहीं चाहता, वह इसे बदलना चाहता है। वह जर्मनी लौटकर इस छुपे हुए इतिहास को सामने लाने का साहस करता है। उसके प्रयास उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाते हैं, जहाँ वह केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि पूरी नई पीढ़ी की आवाज़ बनकर खड़ा होता है।

उपन्यास का चरम उस क्षण में आता है जब लियो संयुक्त राष्ट्र के मंच पर खड़े होकर एक ऐसा वक्तव्य देता है, जो केवल इतिहास की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक नई शुरुआत का आह्वान बन जाता है।

“रेत की चिट्ठियाँ” अंततः यह प्रश्न छोड़ जाती है —

क्या हम अपने अतीत से भागकर आगे बढ़ सकते हैं, या उसे स्वीकार कर ही एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं?

यह उपन्यास प्रेम, पीड़ा, स्मृति और क्षमा के उन धागों को बुनता है, जो महाद्वीपों, संस्कृतियों और पीढ़ियों को एक साझा मानवीय अनुभव में जोड़ देते हैं।

8) About the Author:

कौशलेंद्र मिश्रा ‘कौशल’ प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनका लेखन अनुभव 3 दशकों से अधिक का है। उनके लेख, कहानियाँ और समीक्षाएँ देश की प्रमुख समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते रहे हैं। अब तक उनके दो हज़ार से अधिक लेख  एवं कहानियाँ विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर प्रकाशित हो चुके हैं।

उनकी रचनाएँ अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, पंजाब केसरी, राजस्थान पत्रिका, आनंद बाजार पत्रिका, सामना, हिंदी मिलाप, हरिभूमि, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक आज, स्वतंत्र भारत, सरिता, मुक्ता, सरस सलिल, इंडिया टुडे (हिंदी), आउटलुक (हिंदी) सहित अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।

“वर्तमान में वे एक सैटेलाइट चैनल के मालिक हैं और प्रसार भारती के संवाददाता भी हैं। उनकी एक नॉवेल ‘अर्जियां’ पर बॉलीवुड में फिल्म बन चुकी है।”

उनकी लेखनी का विषय-विस्तार समसामयिक मुद्दों, सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक चेतना, साहित्य और मानवीय संवेदनाओं तक फैला हुआ है। सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावी भाषा-शैली उनकी विशेष पहचान है। पत्रकारिता और साहित्य के संगम पर उनकी सक्रियता ने उन्हें हिंदी लेखन जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है।

 

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