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Antarrag
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Genre: Children Book
Language: Bengali
Pages: 101
Binding: Paperback
Book size: 5.5X8.5 inch
ISBN: 9788199001510
Author: Subhas Chandra Datta
"अंतरराग" एक शब्द जो बाहर नहीं, भीतर बोलता है। यह केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह आत्मा की उस ध्वनि का आलोक है, जो जीवन के हर रंग, हर छाया, हर विस्मय और हर कटुता में गूंजता है। यह संग्रह जीवन की उन धड़कनों का दस्तावेज़ है जिन्हें अक्सर हम सुन तो लेते हैं, पर समझ नहीं पाते।
इस पुस्तक में संकलित कविताएं जीवन के विविध रहस्यों और तत्वों को उजागर करती हैं, कभी वे मनुष्य की विडंबनाओं पर तीखा व्यंग करती हैं, तो कभी आशाओं के मीठे स्वप्नों में रची-बसी एक मधुर रागिनी बन जाती हैं। यह एक ऐसी यात्रा है, जो पाठक को स्वयं के जीवन से रूबरू कराती है,उसके भीतर छिपे संघर्ष, पीड़ा, उत्साह और सृजन की भावना को शब्दों का स्वर देती है।
"अंतरराग" में जीवन को महज़ घटनाओं की श्रृंखला नहीं माना गया है, बल्कि उसे एक कला, एक अनुभव, और एक संगीतात्मक यात्रा के रूप में देखा गया है। इसमें कवि का दृष्टिकोण कहीं आलोचनात्मक है, तो कहीं दर्शनीय, कहीं प्रश्नवाचक, तो कहीं समर्पित। इस संग्रह की रचनाएं आपको झकझोरेंगी भी, और चुपचाप भीतर तक उतर जाएंगी।
कविताओं में कभी जीवन की विफलताओं की कोमल अभिव्यक्ति है, तो कहीं सफलता की उजली किरणें। कहीं मां की आंखों में छिपते सपनों की करुणा, तो कहीं कविताओं की चुप्पियों में गूंजता बलिदान। यहां सफ़र की रूहानी लहरें भी हैं, और वक्त की धार पर बिखरते रिश्तों की कड़वाहट भी। यही द्वंद्व, यही संगति, यही "अंतरराग" है, जो जीवन के भीतर से उपजा है।
इस संग्रह की भाषा सरल होते हुए भी गहरी है, और शैली आत्मीय होते हुए भी मार्मिक। हर कविता एक द्वार है, जो आत्मा की किसी कोठरी को खोलता है, और पाठक को एक नए अनुभव से जोड़ता है।
मैं आशा करता हूं कि "अंतरराग" आपके भीतर के मौन से संवाद करेगा। यह पुस्तक पढ़ते हुए आप शायद खुद को ही पढ़ने लगें और यही इस रचना का उद्देश्य है।

